ख्वाबों की दुनिया

“सोच से परे है एक जहां ,

पर ना जाने वो है कहाँ,

जीने की ख्वाहिश में वो जहां ढूंढते है,

ख्वाबों की दुनिया शायद इसी को कहते है ।।
है हम ही राजा और हम ही है रंक यहाँ के,

ये दुनिया है बिल्कुल परे इस जहां के ।।

हा ये दुनिया है हमारे ख्वाबों की दुनिया, हमारे अपने ख्वाबों की दुनिया जिसके सिकन्दर हम खुद  है । 

इस दुनिया के रचयिता भी हम है और इस दुनिया के ध्वंशक भी हम ।।

ये  एक ऐसी दुनिया है जिसे हम हर रोज नए रंगों से सजाते है, 

दुनिया के जो रंग भी हमे नही पसंद वो इस दुनिया के भीतर कोई पनाह नही पाते है ।।

इस दुनिया मे हम अपने दुश्मनों को भी दोस्त बनाके चलते है तो इस दुनिया मे कही न कही हम भगवान से भी मिलते है।।


जिसकी जो सोच है वो उसी हिसाब से कहता है 

स्वपन हर कोई देखता है पर कोई कोई ही उसे बयान करता है।।

ये दुनिया इस दुनिया से काफी अलग है , यहां हर कोई साथी है ,

कहने को है बात हँसी की पर हर कोई यहां चींटी समक्ष हाथी है ।।
किरदार दिखे जो पर्दे पर वो किरदार भी  यहाँ जी जाते है,

सच कहु तो नींद से परे किरदार पर्दे पर ही रह जाते है।।
घुट पिये जो विष के जग में ,

नींद में अमृत बन जाते है,

दुनिया से परे होकर,

हम और कही जग जाते है।।

हर पल यहाँ बिताये शायद ही याद रह पाते है,

जो याद रह गए वो पल कभी कभी नींद उड़ाते है ।।

सपने वही जो सोने ना दे , नींद के आड़ में उसे खोने ना दे ,

ख्वाबों की हो बनावट ऐसी , जो हकीकत में यकीन होने ना दे ।।

ख्वाबों का पीछा करके न जाने कितने आबाद हो गए,

जो ख्वाबों में ही रह गए वो शायद कही बर्बाद हो गए।।

ये ख्वाब की दुनिया है सबसे हसीन ,

कही सफेद तो कही रंगीन ।।

सोच समझ तू कदम बढ़ा ,

हर मोड़ यहां षडयंत्र गढ़ा ।।

सिर्फ ख्वाब में रह के फस जाओगे …

ख्वाबों में जाके बाहर आ गए .. यकीन मानो सफलता जरूर पाओगे ।। “

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